विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : दिनांक 16.11.2025 को साहित्य दर्पण की मासिक काव्य गोष्ठी कवि कैलाश चन्द्र यादव के सौजन्य से उनके आवास पर उनके जन्मदिन के अवसर पर आयोजित हुई। काव्य गोष्ठी में उनकी तेईसवीं कृति है चांद चेहरा तेरा का विमोचन भी किया गया तथा उनका 66वां जन्म दिवस मनाया गया। वहां उपस्थित सभी कवियों ने कैलाश चंद्र यादव को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं तथा अपनी श्रेष्ठ रचनाएं पढ़कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
ओमशरण चंचल आर्य ने जन्मदिन आये बारंबार
प्रतोष मिश्रा ने ‘तुम गीदड़ भभकी देते हो हम बनकर सिंह दहाड़ेंगे। ये नई सदी का भारत है, हम घर में घुसकर मारेंगे’
शेष कुमार सितारा ने जब कहा नहीं जाता तब यूं ही जाने देता हूं, मैं शब्दों के साथ जबरदस्ती नहीं करता
विवेक कुमार मानस ने दीवारों को बात सुनाना चाहता हूँ, लफ्ज़ों को मैं गीत बनाना चाहता हूँ।
सुभाष चन्द्र अग्रवाल जी ने आंखें खुलती हैं बंद होने के बाद अपने याद आते हैं चले जाने के बाद
वी के मिश्रा ने बात दिल की बतायें कैसे? अपना ही दर्द छुपायें तो छुपायें कैसे।
शुभम लोहनी ने जहरीले साँप कभी करुणा की बात नहीं सुन पाते है, वह तभी मानते जब उनके कुछ दाँत उखाड़े जाते हैं, सुनाकर देशद्रोहियों पर अपनी भड़ास निकाली।
डॉक्टर सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने इंसान से मंहगी हुई हैं रोटियां जिस्म की अब नुच रही हैं बोटियां
बीडी पांडे ने हारमोनियम पर आपको जन्मदिन की बधाई गीत गाकर कैलाश चन्द्र यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।
हेमचंद्र जोशी ने बिहार चुनाव पर तंज कसते हुए कहा कि गांधीजी फिर 78 साल बाद इलेक्शन में याद आ गए, योगी जी की कृपा से उनके बंदर चुनाव में छा गए
कैलाश चन्द्र यादव ने चलो हिन्दी की महिमा हम बड़े ही शान से गायें, कलम के हम सिपाही हैं वतन के वास्ते गायें
सोमपाल सिंह प्रजापति ‘सोम’ ने यारो मजाक ना बनाओ मेरे वेश का। मैं सच्चा आशिक हूं मेरे देश का।
प्रतोष मिश्रा ने संस्था के पचास वर्ष पूरे होने पर जनवरी 2026 में होने वाले कार्यक्रम की तैयारी के लिए सभी से सहयोग की अपील की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीके मिश्रा ने की। वहां जगवीर सिंह, विजय प्रकाश कुशवाह आदि उपस्थित रहे।



