भीड़ लेकर कोतवाली में बयान दर्ज करवाने जाने को कोर्ट ने बताया अनुचित
काशीपुर/नैनीताल (महानाद) : अपने पर दर्ज 5 मुकदमों के मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे अनूप अग्रवाल को निराश होना पड़ा। जहां कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, वहीं 10-15 वकीलों, विधायक और अपने समर्थकों के साथ कोतवाली काशीपुर में बयान देने जाने को कोर्ट ने पुलिस विवेचना में हस्तक्षेप व दबाव बनाने का प्रयास माना और अनुचित बताया।
आपको बता दें कि हाईकोर्ट नैनीताल में अनूप अग्रवाल द्वारा अपने विरुद्ध दर्ज पांच मुकदमों के संबंध में विभिन्न प्रकार की राहत मांगी गई थी। उनके द्वारा दायक की गई याचिका में मुख्य रूप से सभी विवेचनाओं को सीबीआई अथवा अन्य एजेंसी को स्थानांतरित करने, दर्ज मुकदमों को अवैधानिक घोषित करने तथा सभी एफआईआर को निरस्त (क्वैश) करने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को क्रमशः अलग-अलग आधारों पर भ्रमात्मक, अंतर्विरोधी एवं अस्पष्ट पाया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता से संबंधित दो मामलों में जांच अधिकारी कोर्ट में जार्च शीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि अन्य मामलों में अभी जांच जारी हैं।

कोर्ट ने इस बात पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की कि अनूप अग्रवाल ने कोर्ट द्वारा दी गई प्रोटेक्शन का दुरुपयोग किया। अनूप अग्रवाल 15-20 लोगों के समूह के साथ, जिसमें 10दृ12 अधिवक्ता एवं एक वर्तमान विधायक भी शामिल थे, कोतवाली में जांच अधिकारी के सामने अपने बयान दर्ज कराने पहुंचे थे, जो पूर्णतः अनुचित था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में किसी भी व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। अंततः सभी तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता अनूप अग्रवाल को कड़ी फटकार लगाई।



