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Tuesday, June 9, 2026
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तो.. उद्धव ठाकरे, शरद पवार की तरह ममता से छिन जायेगी टीएमसी?

महानाद डेस्क : 58 विधायकों की बागवत के बाद अब टीएमसी के 20 सासंदों ने अलग गुट बनाकर एनडीए में शामिल होने की घोषणा कर दी। पार्टी की इस बड़ी टूट के बाद लगता है जैसे महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के हाथ से शिवसेना और शरद पवार के हाथ से राष्टवादी कांग्रेस पार्टी निकल गई उसी तरह से ममता बनर्जी ने जिस टीएमसी को बनाया था वह उनसे छिन जायेगी।

जी हां, पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायक दल में टूट के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में उनके लिए अलग व्यवस्था देने की मांग की है। सांसदों ने कहा है कि वह एनडीए में शामिल होना चाहते हैं। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, काकोली घोष दस्तीदार, जगदीश वसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, कालीपदा सोरेन, असित मल, सुवेंदु शेखर रॉय सहित 20 सांसद शामिल हैं। वहीं इन सासंदों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना नेता चुन लिया है।

उधर, इससे पहले टीएमसी से निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद पर अपना दावा पेश करते हुए टीएमसी के 58 विधायकों के समर्थन का दावा कर दिया।

ऋतब्रता बनर्जी ने 58 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को सौंप कर ‘वास्तविक तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में मान्यता देने की मांग की है। उन्होंने मुर्शिदाबाद के रघुनाथगंज से विधायक अख्रुज्जमान को मुख्य सचेतक तथा एंटाली से संदीपान साहा और कस्बा से जावेद खान को उपनेता के रूप में प्रस्तावित किया है।

पार्टी के 2 तिहाई विधायकों और सांसदों की बगावत के बाद यह तय माना जा रहा है कि बागी गुट को कानूनी तौर पर टीमसी की मान्यता मिल जायेगी और उद्धव ठाकरे, शरद पवार के बाद ममता बनर्जी तीसरी नेता बन जायेंगी जिनके हाथ से उनकी पार्टी और सिंबल छिन जायेगा।

बता दें कि महाराष्ट्र में 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना तोड़दिया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना और ‘तीर-कमान’ का चुनाव चिह्न सौंप दिया था। जिसके बाद उद्धव ठाकरे गुट को अपनी पार्टी का नाम शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे रखना पड़ा और उन्हें चुनाव आयोग की ओर से मशाल चुनाव चिह्न आवंटित किया गया।

उधर, इसी तरह अजित पवार ने शरद पवार द्वारा बनाई गई राकांपा को तोड़ दिया था और चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को असली राकांपा के तौर पर मान्यता देते हुए पार्टी सिंबल घड़ी उन्हें सौंप दिया था।

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