सुहानी अग्रवाल
देहरादून (महानाद) : भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे से कांग्रेस की बौखलाहट एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व उत्तराखंड में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहा है, संगठन को चुनावी दिशा दे रहा है और 2027 की तैयारियों को धार दे रहा है, जबकि कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी को मजबूत करने के बजाय भाजपा की गतिविधियों पर बयानबाजी करने में व्यस्त हैं। इससे साफ है कि कांग्रेस का अपना राजनीतिक एजेंडा पीछे छूट चुका है और भाजपा उसकी राजनीति का केंद्र बन गई है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता ‘नाराज फूफा’ की भूमिका में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें अपनी पार्टी की चिंता ही नहीं रही। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उत्तराखंड पहुंचे तो कांग्रेस परेशान, संगठन की बैठक हुई तो कांग्रेस परेशान और 2027 की तैयारियां तेज हुईं तो कांग्रेस की बेचैनी और बढ़ गई। उन्होंने कहा कि भाजपा की हर गतिविधि पर टिप्पणी करने से कांग्रेस की अपनी राजनीतिक निष्क्रियता नहीं छिप सकती।
उन्होंने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह जैसे प्रमुख चेहरों की गैरमौजूदगी बहुत कुछ कहती है। जिस पार्टी को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक में एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए, उसके प्रमुख नेता ही दिखाई न दें और दूसरी ओर वही पार्टी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे पर लगातार प्रतिक्रिया देती रहे, तो इससे कांग्रेस की प्राथमिकताएं और अंदरूनी स्थिति दोनों स्पष्ट हो जाती हैं।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी भाजपा नहीं, बल्कि भाजपा की मजबूती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा का संगठन पूरी ताकत से जनता के बीच सक्रिय है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में संगठनात्मक गतिविधियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और 2027 को लेकर पार्टी पूरी तरह तैयार है। इसके विपरीत कांग्रेस के पास न स्पष्ट दिशा दिखाई दे रही है और न ही ऐसा कोई ठोस वैकल्पिक एजेंडा, जिसे वह जनता के बीच लेकर जा सके।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता ‘नाराज फूफा’ की तरह हर बात पर शिकायत और हर कदम पर आपत्ति दर्ज कराने में लगे हैं। भाजपा की हर बैठक पर टिप्पणी, हर कार्यक्रम पर सवाल और हर गतिविधि पर प्रतिक्रिया देना ही उनकी राजनीति बन चुकी है। दिल्ली में बैठकर उत्तराखंड की राजनीति पर नजर रखने से चुनावी जमीन तैयार नहीं होती। जनता जमीन पर सक्रिय संगठन और सिर्फ बयान देने वाले नेताओं के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को भाजपा की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए। जिस पार्टी के भीतर राष्ट्रीय अध्यक्ष की बैठक में भी एकजुटता नजर नहीं आती, वह भाजपा के संगठन और चुनावी तैयारियों पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक कमजोरी ही उजागर कर रही है। भाजपा 2027 के लिए मैदान में पूरी ताकत और आत्मविश्वास के साथ उतर चुकी है, जबकि कांग्रेस अभी भी ‘नाराज फूफा’ की तरह भाजपा के हर कदम पर प्रतिक्रिया देने में लगी है। कांग्रेस की बढ़ती बेचौनी इस बात का संकेत है कि भाजपा की चुनावी तैयारी का असर उसे अभी से दिखाई देने लगा है।



