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Tuesday, May 19, 2026
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूड़ी का निधन

सुहानी अग्रवाल
देहरादून (महानाद) : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूड़ी का आज निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे, उन्होंने मैक्स हॉस्पिटल में सुबह 11ः15 बजे अंतिम सांस ली।

मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी 2007-2009 और 2011-2012 तक 2 बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। वह गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से 16वीं लोकसभा के सांसद भी रहे। उन्होंने सेना से रिटायर होन के बाद राजनीति में कदम रखा था। उनकी सुपुत्री ऋतु भूषण खंडूड़ी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि खंडूड़ी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन एवं समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने प्रदेशहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विकास को नई दिशा प्रदान की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भुवन चंद्र खंडूड़ी जी की सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

आपको बता दें कि जिन्हें मेजर जनरल (से.नि.) बीसी खण्डूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 में देहरादून में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सीएमई) पूणे, इन्स्टिटूयूट ऑफ इंजिनियर्स, नई दिल्ली और रक्षा प्रबंध संस्थान सिकन्दराबाद में शिक्षा प्राप्त की।

उन्होंने 1954 से 1990 तक भारतीय सेना की कोर ऑफ इन्जिनीयर्स में सेवा की। भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा के लिए उन्हे १९८२ में राष्ट्रपति द्वारा अति विशिष्ट सेवा मैडल प्रदान किया गया।

सेवानिवृत्ति के उपरान्त वे राजनीति में आए और 1991 तथा बाद के चुनावों में उत्तराखण्ड के गढ़वाल क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

वे अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में वे सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। 2003 में उन्हे कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मंत्री के रूप में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रतिष्ठत विकास परियोजना को और तत्परता से दक्षता राष्ट्रीय राजमार्ग से लागू किया।

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