सुहानी अग्रवाल
देहरादून (महानाद) : संदिग्ध लेन-देन वाले बैंक खाते तथा म्यूल अकाउंट (‘खच्चर खाता’ एक ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी ऑनलाइन धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों से कमाए गए काले धन को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए करते हैं) सप्लाई करने वाले गिरोह एसटीएफ उत्तराखंड की डिजिटल निगरानी में हैं।
उत्तराखण्ड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा साइबर अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक और बड़ी विधिक कार्रवाई की गई है। देश भर में चल रहे डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम की अवैध रकम को विभिन्न बैंक खातों में मंगवाकर उसकी लेयरिंग करने वाले एक संगठित गिरोह के 3 सदस्यों के विरुद्ध थाना साइबर क्राइम, देहरादून में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसटीएफ की साइबर टीम अब ऐसे सभी डिजिटल, गूगल और बैंक अकाउंट्स पर कड़ी तकनीकी व डिजिटल निगरानी रख रही है, जो चंद रुपयों या कमीशन के लालच में साइबर ठगों के मददगार बन रहे हैं
एसटीएफ की जांच में हुआ खुलासा: कैसे काम कर रहा था यह सिंडिकेट?
म्यूल अकाउंट्स का जाल: जांच में सामने आया है कि कुछ लोग मामूली कमीशन या पैसों के लालच में आकर अपने बैंक खाते, इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड इन अपराधियों को इस्तेमाल के लिए दे रहे थे।
मल्टी-लेयरिंग : पुलिस और कानून को धोखा देने के लिए आरोपी इस ठगी की रकम को तुरंत कई अलग-अलग बैंक खातों, एटीएम निकासी और पीओएस ट्रांजेक्शन के जरिए ट्रांसफर कर देते थे, ताकि मनी ट्रेल (धन के स्रोत) को उलझाया जा सके।

एसटीएफ उत्तराखण्ड द्वारा जारी आधिकारिक एडवाइजरी :
1-कमीशन का लालच पड़ेगा भारी : थोड़े से कमीशन या पैसों के लालच में आकर किसी भी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक अकाउंट बिल्कुल न खुलवाएं।
2- खाता किराए पर देना गंभीर अपराध : कभी भी किसी अनजान, अनधिकृत या बाहरी व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल (किराए) के लिए न दें।
3- क्रेडेंशियल्स रखें पूरी तरह गोपनीय : अपनी इंटरनेट बैंकिंग का यूजरनेम, पासवर्ड, यूपीआई पिन या गूगल अकाउंट क्रेडेंशियल्स किसी के साथ भी साझा न करें।
4- सिम कार्ड का दुरुपयोग रोकें : अपने नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने या बेचने के लिए न दें।
5- बैंकिंग किट्स को रखें सुरक्षित : अपने बैंक की चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड हमेशा अपने पास सुरक्षित रखें, इन्हें किसी और को सौंपना कानूनन गलत है।
6- अज्ञात ट्रांजेक्शन पर तुरंत नजर : यदि आपके खाते में अचानक कोई अज्ञात या संदिग्ध बड़ी रकम ट्रांसफर होती है, तो तुरंत अपने बैंक और पुलिस को सूचित करें।
7- हर डिजिटल फुटप्रिंट ट्रैक हो रहा है : याद रखें, डिजिटल दुनिया में किया गया हर एक ट्रांजेक्शन ट्रैक होता है। एसटीएफ की साइबर टीम गहन वित्तीय विश्लेषण के जरिए हर संदिग्ध खाते की निगरानी कर रही है।
8- अपराधियों के सीधे हिस्सेदार : साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते या संसाधन उपलब्ध कराना आपको कानूनी रूप से उनका हिस्सेदार बना देता है।
9- कठोर कानूनी कार्रवाई तय : म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी उतनी ही कठोर कानूनी कार्रवाई (गिरफ्तारी व मुकदमा) की जा रही है, जितनी वास्तविक अपराधियों पर।
10- सजग रहें, सुरक्षित रहें : आपकी एक छोटी सी लापरवाही या चंद रुपयों का लालच आपको साइबर अपराधियों का मददगार साबित कर जेल पहुँचा सकता है।
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