विकास अग्रवाल
काशीपुर (महानाद) : समाजसेवी एवं कारोबारी उर्वशी दत्त बाली का कहना है कि आज के समय में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि एक महिला करियर चुने या परिवार? लेकिन मेरी सोच थोड़ी अलग है। मेरे लिए एक सफल महिला वही है जो अपनी जिम्मेदारियों के बीच एक सुंदर बैलेंस बना सके।
उर्वशी कहती हैं कि मैंने हमेशा अपने परिवार को प्रथम वरीयता दी है। अपने पति के साथ कारोबार में काम किया, घर और बेटी की जिम्मेदारियाँ निभाईं और साथ ही सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रही। जब मेरे पति राजनीति में आए, तब भी मैं हर कदम पर उनके साथ खड़ी रही। मैंने कभी किसी एक रोल के लिए दूसरे रोल को नेगलेक्ट नहीं किया। मेरा विश्वास है कि हर भूमिका का अपना महत्व है।
उर्वशी बाली कहती हैं कि मेरी सोच है कि शादी के बाद पति पत्नी सिर्फ पति-पत्नी नहीं, बल्कि एक टीम होते हैं। जब दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और एक-दूसरे के सपनों का साथ देते हैं, तभी परिवार भी आगे बढ़ता है और समाज भी, एडजस्टमेंट दोनों तरफ से होती है। मैं यह नहीं मानती कि कामकाजी महिला बनने का मतलब घर को छोड़ देना है। उसी तरह मैं यह भी नहीं मानती कि घर संभालने वाली महिला किसी कामकाजी महिला से कम है। हर परिवार की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए हर महिला अपना रास्ता स्वयं तय करती है। लेकिन अगर हम अपने परिवार, अपने रिश्तों और अपने सपनों के बीच संतुलन बना सकें, तो वही सबसे बड़ी सफलता है।
उर्वशी कहती हैं कि हमारी संस्कृति और परंपराएँ भी हमें परिवार, सहयोग और जिम्मेदारी का महत्व सिखाती हैं। मेरे लिए परिवार केवल एक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि मेरी सबसे बड़ी ताकत है। उसी ताकत ने आज तक मुझे अपने सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास भी दिया। मैं हमेशा यही मानती हूँकृ परिवार पहले और फिर करियर और साथ-साथ उद्देश्य। जब परिवार आपका सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम बन जाता है, तब आप अपने सपने भी पूरे कर सकते हैं और दूसरों के लिए भी एक उदाहरण बन सकते हैं।
उर्वशी दत्त बाली कहती हैं कि सच्ची सफलता वही है, जिसमें आपका परिवार भी खुश हो और आपका काम भी आगे बढ़े तथा आपके प्रयासों से समाज में भी सकारात्मक बदलाव आए। परिवार और करियर एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बस थोड़ा समझने की जरूरत है, और परिवार की रजामंदी लेकर चलने की। बस वही एक सफल ग्रहणी है।



